पिता के संघर्ष ने बेटे को बनाया स्टेशन मास्टर, देवेंद्रनगर के लिए गौरव बने भूपेंद्र कुशवाहा

देवेंद्रनगर। कहते हैं कि माता-पिता का संघर्ष और बच्चों की मेहनत मिलकर सफलता की नई इबारत लिखते हैं। इसकी मिसाल देवेंद्रनगर निवासी जगन्नाथ कुशवाहा और उनके पुत्र भूपेंद्र कुमार कुशवाहा ने पेश की है। 24 अक्टूबर को देवेंद्रनगर से चुरहट के लिए पहली मेमू ट्रेन के शुभारंभ के ऐतिहासिक अवसर पर देवेंद्रनगर रेलवे स्टेशन में स्टेशन मास्टर के रूप में पदस्थ भूपेंद्र कुमार कुशवाहा की उपस्थिति नगरवासियों के लिए विशेष गौरव का विषय रही। भूपेंद्र की इस उपलब्धि के पीछे उनके पिता जगन्नाथ कुशवाहा का वर्षों का संघर्ष, त्याग और समर्पण है। जगन्नाथ कुशवाहा सरस्वती शिशु मंदिर, देवेंद्रनगर में आचार्य सहायक के पद पर कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों और साधारण नौकरी के बावजूद उन्होंने बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कोई कमी नहीं आने दी। कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों के बेहतर भविष्य को हमेशा प्राथमिकता दी। जगन्नाथ कुशवाहा की मेहनत का परिणाम है कि उनके पुत्र भूपेंद्र कुमार कुशवाहा आज रेलवे विभाग में स्टेशन मास्टर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी पुत्री का भी शासकीय सेवा में चयन हुआ है। परिवार के अन्य बच्चे भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। इस उपलब्धि में सरस्वती शिशु मंदिर, शिक्षा भारती एवं सरस्वती विद्या परिषद जैसी शैक्षणिक संस्थाओं की संस्कारयुक्त शिक्षा और मार्गदर्शन का भी महत्वपूर्ण योगदान बताया जा रहा है। देवेंद्रनगर में पहली मेमू ट्रेन के शुभारंभ अवसर पर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसद, विधायक और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी के बीच स्टेशन मास्टर के रूप में भूपेंद्र कुमार कुशवाहा का अपने दायित्वों का निर्वहन करना परिवार के लिए यादगार क्षण बन गया। पिता जगन्नाथ कुशवाहा का संघर्ष और पुत्र भूपेंद्र की सफलता उन अभिभावकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारने का सपना देखते हैं।



