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UP News: वृद्धाश्रमों में रह रहे 6,607 बुजुर्गों को सहारा, 2,551 को मिला आयुष्मान कार्ड

UP News: उत्तर प्रदेश में वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को केवल रहने की सुविधा देने के बजाय उनकी स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रदेश के वृद्धाश्रमों में रहने वाले पात्र बुजुर्गों को सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 75 वृद्धाश्रमों में 6,607 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें से पात्र 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि 4,901 बुजुर्ग वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रहे हैं।

75 वृद्धाश्रमों में 6,607 बुजुर्गों को आश्रय

समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में संचालित 75 वृद्धाश्रमों में हजारों बुजुर्गों को सुरक्षित रहने की सुविधा मिल रही है। सरकार का जोर है कि वृद्धजनों को आश्रय देने के साथ उनकी दूसरी जरूरी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए।

उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं। ऐसे में वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को समय पर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से पात्र बुजुर्गों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जा रहा है।

2,551 बुजुर्गों को मिला आयुष्मान कार्ड

वृद्धाश्रमों में रहने वाले पात्र 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके जरिए पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है।

विभाग की कोशिश है कि जो पात्र बुजुर्ग अभी इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी जरूरी दस्तावेज और पात्रता पूरी होने के बाद योजना के दायरे में लाया जाए। इससे वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए इलाज से जुड़ी आर्थिक चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है।

4,901 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन

स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ बुजुर्गों की आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। वर्तमान में 4,901 पात्र बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है।

वृद्धावस्था पेंशन का उद्देश्य पात्र बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपनी जरूरी जरूरतों के लिए कुछ वित्तीय सहारा मिल सके। वृद्धाश्रम में रहने वाले पात्र लोगों को इस योजना से जोड़ना उनकी सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पात्र महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन से जोड़ने की पहल

वृद्धाश्रमों में रहने वाली पात्र महिलाओं को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। पात्र महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन योजना से जोड़ने की प्रक्रिया के जरिए उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य है कि वृद्धाश्रमों में रहने वाली महिलाओं को उनकी पात्रता के अनुसार अलग-अलग योजनाओं का लाभ मिल सके और उन्हें आर्थिक रूप से अतिरिक्त सहारा मिले।

सम्मानजनक जीवन को प्राथमिकता

समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण के अनुसार, वृद्धजनों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को केवल आश्रय देने के बजाय उनकी स्वास्थ्य और आर्थिक जरूरतों को भी पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार की कोशिश है कि बुजुर्गों को ऐसी सुविधाएं मिलें, जिससे वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें और जरूरत पड़ने पर इलाज तथा आर्थिक सहायता भी प्राप्त कर सकें।

योजनाओं से जोड़ने का काम जारी

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, पात्र बुजुर्गों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। लाभार्थियों के लिए आधार कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने में भी विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 1,073 नए बुजुर्गों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है। विभाग का प्रयास है कि पात्रता रखने वाले अधिक से अधिक बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके।

आश्रय के साथ स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा

उत्तर प्रदेश में वृद्धाश्रमों को केवल रहने की जगह के रूप में नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। 6,607 बुजुर्गों को वृद्धाश्रमों में आश्रय मिलने के साथ हजारों पात्र लोगों को पेंशन और आयुष्मान योजना से जोड़ा गया है।

आयुष्मान कार्ड के जरिए स्वास्थ्य सुरक्षा और वृद्धावस्था पेंशन के जरिए आर्थिक सहायता देने की कोशिश की जा रही है। वहीं पात्र महिलाओं को निराश्रित महिला पेंशन से जोड़ने का काम भी जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि बुजुर्गों को जीवन के इस पड़ाव में सुरक्षित आश्रय के साथ सम्मान, इलाज और आर्थिक सहारा भी मिल सके।

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