आदिवासियों के विस्थापन के खिलाफ आंदोलन को बृंदा करात का समर्थन
अजयगढ़ पहुंचकर आंदोलनकारियों की सुनी समस्याएं, दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

मुआवजे और पुनर्वास का मुद्दा भोपाल से दिल्ली तक उठाने की घोषणा
पन्ना। केन-बेतवा लिंक और मझगाय बांध परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासियों एवं विस्थापित परिवारों के आंदोलन को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) की वरिष्ठ नेता बृंदा करात का समर्थन मिला है। सोमवार, 26 अक्टूबर को अजयगढ़ पहुंचीं बृंदा करात ने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास के मुद्दे पर केंद्र एवं मध्यप्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रभावित परिवारों की आवाज भोपाल से दिल्ली तक पहुंचाने की बात कही। आंदोलन स्थल पर बृंदा करात ने केंद्र की मोदी सरकार और मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल करना और उनके मकानों पर बुलडोजर चलाना उचित नहीं है।

प्रभावित परिवारों को उनके अधिकारों के अनुरूप मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए। बृंदा करात ने आंदोलन से जुड़ी दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में आदिवासियों की आवाज उठाने के बाद दिव्या के विरुद्ध झूठे आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि दिव्या अहिरवार सरकार के कथित दमनकारी रवैये के आगे नहीं झुकेंगी। करात ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गांवों में बिना पहचान बताए पुलिसकर्मियों के पहुंचने तथा महिलाओं और उनके परिजनों को परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलनों के दौरान विशेषकर महिलाओं के संबंध में निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं और नियमों का पालन होना चाहिए। इस मामले में वे पन्ना पुलिस अधीक्षक से भी चर्चा करेंगी। अजयगढ़ में आंदोलनकारियों से मुलाकात के बाद बृंदा करात पन्ना पहुंचीं, जहां सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले में आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना के औचित्य के साथ वन, वन्यजीवों और आदिवासियों के अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठाए। करात ने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावित लोगों को उनके अधिकार के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन पन्ना में प्रभावित परिवारों को उचित लाभ नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने जिले के आठ ऐसे गांवों के विस्थापन पर भी आश्चर्य जताया, जो प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं हैं। उन्होंने इसे अन्याय बताते हुए पूरे मामले को उच्च स्तर पर उठाने की बात कही।
दो दिन पन्ना में रहकर प्रभावित परिवारों से करेंगी चर्चा
बृंदा करात ने कहा कि वे दो दिन पन्ना में रहकर आदिवासियों और विस्थापित परिवारों से बातचीत करेंगी। इस दौरान उनकी समस्याओं और मांगों की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआईएम प्रभावितों के अधिकारों के संघर्ष में उनके साथ खड़ी है और विस्थापन, पुनर्वास तथा मुआवजे से जुड़े मुद्दों को भोपाल से लेकर दिल्ली तक उठाया जाएगा। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर, सीपीआईएम के राज्य सचिव जसविंदर सिंह, धर्मेंद्र पटेल एवं जिला सचिव केश कुमार कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी और आंदोलनकारी उपस्थित रहे।



