रासमंडल में हुआ राज जी का पदार्पण, ब्रह्म चबूतरे पर रातभर झूमे सुंदरसाथ
सोलह शृंगार में सजीं महिलाएं, रंग-बिरंगी पोशाकों में नजर आए पुरुष

प्रेम, भक्ति और समर्पण से सराबोर रहा पन्ना धाम
पन्ना। अंतरराष्ट्रीय शरद पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत श्री 108 प्राणनाथ जी मंदिर के विशाल ब्रह्म चबूतरे पर मध्यरात्रि में रासमंडल में राज जी के पदार्पण के साथ ही रास की लीलाएं प्रारंभ हो गईं। देखते ही देखते पूरा परिसर प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। देश-विदेश से आए सुंदरसाथ के साथ स्थानीय धामी समाज के श्रद्धालु भी रास-गरबा में शामिल होकर भक्ति के इस अनूठे आनंद में डूबे नजर आए। रासमंडल में अलग-अलग टोलियों में महिला-पुरुष, युवक-युवतियां पारंपरिक अंदाज में रास-गरबा करते हुए अपने प्रीतम राज जी को रिझाते रहे। सोलह शृंगार से सजी महिलाएं एवं युवतियां अपनी सुंदर वेशभूषा और भक्तिभाव से आकर्षण का केंद्र रहीं, वहीं पुरुष वर्ग भी रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों में रास की मस्ती में मग्न दिखाई दिया।
हर ओर भक्ति, उल्लास और प्रेम की ऐसी छटा बिखरी कि श्रद्धालु स्वयं को इस दिव्य वातावरण से अलग नहीं रख सके। श्री प्राणनाथ जी की रास लीलाओं की विशेषता यह रही कि यहां प्रेम केवल उत्सव का भाव नहीं, बल्कि परमात्मा से आत्मिक जुड़ाव और उनके प्रति पूर्ण समर्पण का माध्यम बना। श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति प्रेम निवेदित करते हुए रास-गरबा में लीन रहे। मानो हर कदम, हर ताल और हर भाव अपने प्रीतम राज जी के चरणों में समर्पित हो। पूरी रात चले इस आध्यात्मिक आयोजन में देश-विदेश से आए सुंदरसाथ, स्थानीय धामी समाज, नगरवासियों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। ब्रह्म चबूतरे पर दिखाई दिया यह अनुपम दृश्य पन्ना धाम की विशिष्ट आध्यात्मिक परंपरा और गहरी धार्मिक आस्था का जीवंत उदाहरण बना। श्रद्धालुओं ने रास की लीलाओं का आनंद लेकर स्वयं को धन्य और आध्यात्मिक रूप से तृप्त महसूस किया।




