पन्ना की 21 बेटियों को मिला रोजगार, चार और का भोपाल के अपोलो अस्पताल में चयन
कई युवतियों को मिली पहली नियमित नौकरी

ग्रीन इंडिया मिशन के तहत दक्षिण पन्ना वनमंडल की कौशल विकास पहल ला रही रंग
शाहनगर में प्रशिक्षण लेकर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बना रहीं पहचान
पन्ना। दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा ग्रीन इंडिया मिशन के अंतर्गत संचालित आजीविका एवं कौशल विकास कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में चार और प्रशिक्षित युवतियों का अपोलो सेज हॉस्पिटल, भोपाल में प्लेसमेंट हुआ है। इसके साथ ही जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (जीडीए) का प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न अस्पतालों में रोजगार हासिल करने वाली पन्ना जिले की बेटियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा शाहनगर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवतियों को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक एवं व्यावसायिक कौशल सिखाए गए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रशिक्षार्थियों को रोजगार के अवसरों से जोड़ने की पहल की गई। इसके परिणामस्वरूप अब तक युवतियों का अपोलो सेज हॉस्पिटल भोपाल, मेदांता हॉस्पिटल इंदौर और शाल्बी हॉस्पिटल जबलपुर जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में चयन हुआ है।
विशेष बात यह है कि चयनित युवतियों में कई को पहली बार नियमित रोजगार मिला है। वहीं, कुछ युवतियां नौकरी मिलने के बाद अपने परिवार की प्रमुख अथवा एकमात्र आय अर्जित करने वाली सदस्य बन गई हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है, बल्कि ग्रामीण परिवारों में बेटियों की शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश भी पहुंच रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ अन्य क्षेत्रों में भी दिया जा रहा प्रशिक्षण
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा कौशल विकास कार्यक्रमों को केवल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा गया है। पवई, शाहनगर, मोहनद्रा और सलेहा क्षेत्रों में कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, सिलाई, ब्यूटी एवं वेलनेस, वाहन मरम्मत, मोबाइल हार्डवेयर, वेब डेवलपमेंट, शेफ तथा लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप रोजगार, स्वरोजगार तथा आय बढ़ाने के अवसरों से जोड़ना है। वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों से जुड़े समुदायों की आजीविका मजबूत करने की दिशा में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 21 बेटियों को मिला रोजगार इस बात का उदाहरण है कि उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण अंचलों की युवतियां भी बड़े शहरों के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी जगह बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।




