बाघों को बचाने पार्क प्रबंधन करा रहा मवेशियों का टीकाकरण
पालतू कुत्तों को कैनाइन डिस्टेंपर सहित आठ बीमारियों से बचाने का अभियान, मवेशियों का भी होगा टीकाकरण

पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों और अन्य वन्यजीवों को संक्रामक बीमारियों के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। बाघ पुनर्स्थापना योजना के अंतर्गत पार्क की परिधि से लगे गांवों में पालतू कुत्तों और मवेशियों का टीकाकरण किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य घरेलू पशुओं से वन्यजीवों तक संक्रामक बीमारियां फैलने के जोखिम को कम करना है। टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, पालतू कुत्तों में कैनाइन डिस्टेंपर सहित आठ गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण का प्रथम चरण 8 अक्टूबर को ग्राम अकोला से शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत 9 अक्टूबर को अमझेरिया, 10 से 12 अक्टूबर तक बांधी, 13 एवं 14 अक्टूबर को बराछ, 17 अक्टूबर को जरधोवा, 18 अक्टूबर को इटवा तथा 19 अक्टूबर को जनवार में टीकाकरण कार्यक्रम निर्धारित किया गया। कुत्तों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बूस्टर डोज भी लगाए जाएंगे। अभियान का द्वितीय चरण 18 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 6 जनवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा। टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे गांवों में मवेशियों को गलघोंटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए भी व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मवेशियों के टीकाकरण की शुरुआत 12 अक्टूबर को ग्राम अकोला से की गई। इसके बाद 13 अक्टूबर को बड़ौर, 14 एवं 15 अक्टूबर को जरधोवा, 17 अक्टूबर को रमपुरा तथा 18 अक्टूबर को कणवाहा में टीकाकरण कार्यक्रम निर्धारित किया गया। यह अभियान आगामी 11 दिसंबर तक जारी रहेगा। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि बाघों एवं अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आसपास के गांवों में पालतू पशुओं का स्वस्थ रहना भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से घरेलू पशुओं में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रबंधन ने पार्क के परिधिवर्ती गांवों के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पालतू कुत्तों और मवेशियों का निर्धारित समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। पशुपालकों की सहभागिता से घरेलू पशुओं की सुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण के इस महत्वपूर्ण अभियान को भी मजबूती मिलेगी।



