तीन दिवसीय श्रीकृष्ण कथा का समापन, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ

पन्ना। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक नगरी पन्ना स्थित श्री 5 पद्मावती पुरी धाम में परमहंस संत शिरोमणि हिंदू रत्न डॉ. श्री श्री 108 सदानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित 2558वीं त्रिदिवसीय श्रीमद्भागवत श्रीकृष्ण कथा एवं महामति प्राणनाथ जी की वाणी चर्चा का बुधवार को भव्य समापन हुआ। धाम मोहल्ला स्थित मंगल भवन के प्रांगण में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से आए संतों, विद्वानों, पुजारियों, विदुषियों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। तीन दिनों तक चले आयोजन में हजारों श्रद्धालु सुंदर साथ ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। विजयादशमी के पावन अवसर पर 20 अक्टूबर से प्रारंभ हुई कथा में सदानंद जी महाराज ने श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, धर्म और आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, मोहन प्रिया आचार्य महाराज ने महामति प्राणनाथ जी की वाणी का विस्तृत विवेचन करते हुए उसके आध्यात्मिक संदेशों से श्रद्धालुओं को परिचित कराया। कथा एवं वाणी चर्चा के माध्यम से प्रेम, सद्भाव, भक्ति और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई। तीन दिवसीय श्रीकृष्ण कथा एवं वाणी चर्चा कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्थाओं में परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के परम शिष्य अमित सिंगल रावलवासिया, भिवानी (हरियाणा) की प्रमुख भूमिका रही। उनके द्वारा कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संभाली गईं, जिससे देश-विदेश से पहुंचे संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं को आयोजन में सहभागिता का अवसर मिला। धार्मिक आयोजन के सफल संचालन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। पन्ना स्थित श्री 5 पद्मावती पुरी धाम महामति प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक परंपरा और निजानंद संप्रदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस धाम का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व देश-विदेश में फैले सुंदर साथ के लिए विशेष स्थान रखता है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को महामति प्राणनाथ जी की वाणी, आध्यात्मिक विचारधारा और प्रेम-सद्भाव के संदेश से जोड़ते हैं। परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा और वाणी चर्चा का लाभ लेते हैं। इस वर्ष भी तीन दिवसीय आयोजन में श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता रही। बुधवार को कथा के समापन के बाद सदानंद जी महाराज सिलीगुड़ी के लिए रवाना हो गए।




