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खेजड़ा मंदिर में विजयादशमी पर जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा

महाराजा छत्रसाल द्वितीय को भेंट की गई विजय की तलवार और पान-बीड़ा

महामति प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक चेतना एवं बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास का हुआ स्मरण

पन्ना। बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का अनुपम संगम मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के पावन अवसर पर पन्ना स्थित खेजड़ा मंदिर में देखने को मिला। यहां परंपरागत विधि-विधान के साथ पन्ना नरेश महाराजा छत्रसाल द्वितीय को विजय की तलवार एवं पान-बीड़ा भेंट कर ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन किया गया। इस अवसर पर छतरपुर के महाराजा छत्रसाल के वंशज विक्रम सिंह बुंदेला भी उपस्थित रहे। आयोजन के साथ दस दिवसीय शरद पूर्णिमा महोत्सव का भी भव्य शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में संतों के प्रवचनों, धर्मोपदेशों और भक्ति संगीत से वातावरण देर रात तक भक्तिमय बना रहा। खेजड़ा मंदिर में विजयादशमी पर तलवार एवं पान-बीड़ा भेंट करने की परंपरा का संबंध महामति प्राणनाथ जी और महाराजा छत्रसाल के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक संबंधों से जुड़ा है। मान्यता है कि महामति प्राणनाथ जी ने महाराजा छत्रसाल को धर्म और देश की रक्षा के लिए आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्रदान किया था। इसी ऐतिहासिक प्रसंग की स्मृति में प्रतिवर्ष दशहरे पर यह परंपरा निभाई जाती है। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ महाराजा छत्रसाल द्वितीय को तलवार एवं पान-बीड़ा भेंट किया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने बुंदेलखंड के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास का स्मरण किया। समारोह में महाराजा छत्रसाल द्वितीय ने सुंदरसाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजानंद संप्रदाय में लगभग चार सौ वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। महामति प्राणनाथ जी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से महाराजा छत्रसाल ने 52 युद्धों में विजय प्राप्त की। उन्होंने कहा कि महामति प्राणनाथ जी की आध्यात्मिक विरासत और राजपरिवार के साथ जुड़ा संबंध आज भी श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सुंदरसाथ और राजपरिवार के बीच यह आत्मीय संबंध आगे भी बना रहेगा। धर्मोपदेशक पंडित खेमराज जी ने अपने उद्बोधन में महामति प्राणनाथ जी की शिक्षाओं और आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पन्ना की धरती ऐतिहासिक गौरव के साथ आध्यात्मिक चेतना की भी महत्वपूर्ण भूमि है। यहां की परंपराएं समाज को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ प्रेम, सद्भाव, आत्मजागरण और मानव कल्याण का संदेश देती हैं। अमेरिका से आए मनु भाई पटेल ने भी बुंदेलखंड की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।संतों के प्रवचनों और भजनों से गूंजा मंदिर परिसर
कार्यक्रम में संत शिरोमणि सदानंद जी महाराज, पंडित देवकरण त्रिपाठी, रूपराज शर्मा, भोपाल से पधारे पंडित स्वरराज शर्मा, दिलीप महाराज, मस्त बाबा जी और चेतन दास महाराज सहित अनेक संतों एवं धर्माचार्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। श्री 108 प्राणनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश भाई पटेल, उपाध्यक्ष डीके दूबे, सचिव प्रेमकिशोर शर्मा तथा ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी, पुजारी पवन शर्मा, पुजारी दीपक शर्मा, पुजारी दादा भाई सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु सुंदर साथ उपस्थित रहे। भक्ति संगीत कार्यक्रम में अर्चना शर्मा, प्रभा त्रिपाठी, रितेश, छोटू और योगेश सहित अन्य कलाकारों ने महामति प्राणनाथ जी की वाणी का गायन किया। कार्यक्रम का संचालन रीवा से आए मनोज शर्मा, कृष्ण कुमार (छोटू महाराज) ने किया। आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए सुंदरसाथ, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। वक्ताओं ने कहा कि महामति प्राणनाथ जी की शिक्षाएं प्रेम, सद्भाव और मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। डिजिटल माध्यमों से भी उनकी वाणी और निजानंद संप्रदाय की शिक्षाएं देश-विदेश तक पहुंच रही हैं। विजयादशमी पर आयोजित यह समारोह पन्ना की धार्मिक पहचान, बुंदेलखंड के ऐतिहासिक गौरव और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।

 

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