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UP News: वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन, CM योगी बोले- नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम

UP News: वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका लोकार्पण करते हुए इसे भारत-जापान की दोस्ती, विश्वास और साझा विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर सिर्फ जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोने वाला स्थान नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक जीवंत क्लासरूम है। यहां आने वाले युवा यह समझ सकेंगे कि दूरदृष्टि रखने वाला एक नेता दो देशों के संबंधों और भविष्य को नई दिशा कैसे दे सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिंजो आबे को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि भारत और जापान की मित्रता हर साल और मजबूत होती जाए। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के 140 करोड़ लोगों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया।

रुद्राक्ष में हमेशा के लिए संजोई गई आबे की यादें

सीएम योगी ने कहा कि रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर खुद भारत और जापान की दोस्ती का प्रतीक है। जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब इसी परिसर में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृतियों को संजोया गया है।

उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर का दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि 25 वर्ष पहले इसी दिन नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसी दौर में प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के बीच मित्रता की नींव मजबूत हुई। 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मित्रता पद से नहीं बल्कि विश्वास से बनी थी। पद बदलते रहे, लेकिन मित्रता नहीं बदली।

मोदी-आबे की दोस्ती बनी भारत-जापान के रिश्तों की ताकत

मुख्यमंत्री ने भारत-जापान संबंधों में शिंजो आबे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच संबंध नहीं रहे, बल्कि विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित साझेदारी में बदल गए।

2014 में क्योटो में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ। इसके बाद काशी में गंगा आरती में शिंजो आबे की भागीदारी ने दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को और मजबूत किया। 2017 में अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना की शुरुआत भी भारत-जापान सहयोग का बड़ा उदाहरण बनी।

सीएम योगी ने कहा कि दिल्ली मेट्रो, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में जापान का सहयोग रहा है। उन्होंने बताया कि आज करीब 1,400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं।

सेमीकंडक्टर, AI और ग्रीन हाइड्रोजन तक पहुंची साझेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-जापान की साझेदारी अब भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जापान के पास आधुनिक तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास बड़ी युवा आबादी और प्रतिभा है। दोनों देशों की ताकत एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में आज कई रिश्ते आर्थिक हितों और समझौतों के आधार पर तय होते हैं, लेकिन भारत और जापान के रिश्ते विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने जापान को भारत का सच्चा मित्र बताया।

उत्तर प्रदेश और जापान के बीच बढ़ रहा निवेश सहयोग

मुख्यमंत्री ने अपने जापान दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसी वर्ष फरवरी में जापान यात्रा के दौरान जापानी कंपनियों के साथ उत्तर प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के निवेश को लेकर समझौते हुए।

उन्होंने बताया कि यामानाशी अब उत्तर प्रदेश के ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में साझेदार बन रहा है। अगस्त 2024 में यामानाशी के गवर्नर के नेतृत्व में 200 से अधिक निवेशक उत्तर प्रदेश आए थे।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और यीडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित करने की योजना का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क स्थापित किया गया है।

योगी ने कहा, “जापान के पास प्रिसिजन है और उत्तर प्रदेश के पास स्केल।” उन्होंने उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के बाजार, युवा वर्कफोर्स, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट नेटवर्क को राज्य की बड़ी ताकत बताया।

2027 में भारत-जापान संबंधों के 75 साल

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में भारत और जापान के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे। उन्होंने आबे मेमोरियल कॉरिडोर को इस अमृत पर्व की पहली भेंट बताया।

उन्होंने भारत और जापान की सांस्कृतिक समानताओं का भी जिक्र किया। योगी ने कहा कि दोनों देशों ने अपनी पुरानी परंपराओं और विरासत को आधुनिक विकास के साथ आगे बढ़ाया है।

उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर यह संदेश देते हैं कि अपनी विरासत को सुरक्षित रखते हुए भी आधुनिक विकास किया जा सकता है।

जापानी मेहमानों का जापानी भाषा में किया स्वागत

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे और जापान से आए प्रतिनिधिमंडल का जापानी भाषा में स्वागत किया।

उन्होंने जापानी भाषा में वाराणसी आने पर अतिथियों का स्वागत किया और काशी, मां गंगा, भगवान विश्वनाथ तथा सारनाथ की धरती की ओर से जापानी प्रतिनिधिमंडल का अभिनंदन किया। संबोधन के अंत में उन्होंने “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर जापानी मेहमानों का धन्यवाद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आबे मेमोरियल कॉरिडोर आने वाली पीढ़ियों को भारत-जापान मित्रता की कहानी बताएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह स्मृति स्थल दोनों देशों के बीच रिश्तों को और मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

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