चिंता आंदोलन में बैठे लोगों ने फूंका मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला
अपनी मांगों के साथ देश के आंदोलन को भी किया समर्थन

अमित भटनागर ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, आमरण अनशन के 14वें दिन नींबू पानी छोड़ा
पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय बांध, रूँझ बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना से प्रभावित किसानों, आदिवासियों एवं विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और अधिकारों की मांग को लेकर वनहरी कला टपरियन में चल रहा चिता आंदोलन शनिवार को 29वें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” और “लोकतंत्र की हत्या नहीं सहेंगे” जैसे नारे लगाए गए। संगठन ने इस दिन को लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए चल रहे राष्ट्रीय संघर्ष के समर्थन को समर्पित किया।
जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने कहा कि वोट देना और विरोध दर्ज कराना जनता की लोकतांत्रिक ताकत है। उनके आरोप के अनुसार, इन अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
आमरण अनशन के 14वें दिन अमित भटनागर ने अनशन में बदलाव की घोषणा करते हुए नींबू पानी लेना भी छोड़ दिया। संगठन के अनुसार, अब वे केवल पानी के सहारे अनशन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि चिता आंदोलन केवल जमीन, मुआवजे और पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संघर्ष भी है।
अमित भटनागर ने कहा कि प्रभावित किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों को कानून के अनुसार उचित मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और उनके वैधानिक अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने नागरिकों से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जागरूक भागीदारी करने की अपील की।
जय किसान संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों के न्यायपूर्ण पुनर्वास और अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष आगे बढ़ाने की बात कही।




