MP News: करहिया के गोलेश्वर धाम में 11 अक्टूबर से होगा 51 कुंडीय शतचंडी महायज्ञ

MP News: मध्य प्रदेश के करहिया स्थित प्रसिद्ध गोलेश्वर धाम मंदिर में 11 अक्टूबर से धार्मिक आयोजन की शुरुआत होगी। यहां 51 कुंडीय शतचंडी महायज्ञ के साथ श्रीमद्भागवत पुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू होकर 17 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
11 से 17 अक्टूबर तक चलेगा धार्मिक आयोजन
जानकारी के अनुसार, करहिया के गोलेश्वर धाम मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर 51 कुंडीय शतचंडी महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। धार्मिक कार्यक्रम के तहत सात दिनों तक अलग-अलग अनुष्ठान और कथा का आयोजन होगा।
आयोजन के अंतिम दिन 17 अक्टूबर को पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था भी की जाएगी।
सनातन धर्म और जनकल्याण का संदेश
आयोजन से जुड़े संतों और आयोजकों के अनुसार, महायज्ञ का उद्देश्य मां जगदंबा की आराधना के साथ सनातन धर्म की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने की अपील की है।
आयोजन में बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक प्रवचन और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।
कई संत और महामंडलेश्वर होंगे शामिल
आयोजन में देशभर से संतों और धार्मिक विद्वानों के पहुंचने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी महाराज, आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि महाराज और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर महंत हरिगिरि जी महाराज सहित अन्य संतों की सहभागिता बताई गई है।
आयोजन समिति की ओर से धार्मिक कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
श्रद्धालुओं से शामिल होने की अपील
स्वामी वैराग्यानंद गिरि महाराज ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में गोलेश्वर धाम पहुंचकर धार्मिक आयोजन में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
करहिया स्थित गोलेश्वर धाम क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है और यहां पहले भी भागवत कथा, यज्ञ और संत सम्मेलन जैसे आयोजन हो चुके हैं।




